मंगलवार, नवंबर 17, 2009

मेरे ऑरकुट प्रोफाइल की शीर्ष पंक्तियाँ

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लापता मेरी आँख का आंसू
तेरी आँखों में मैंने जब देखा
होठों में कैद कर लिया,
फिर गुमने ना दिया.
(दिसम्बर २००९)

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सागर जैसी गहरी आँखों में नीली उदासी रहती है जो
आंसू की लहरों में ढलके गालों के तट पर बहती है. 
       (15 नवम्बर  2009)

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वक़्त की शाख से कुछ फूल हमने तोड़े थे
तेरे जुड़े में लगाने को....
मगर कभी तुम ने वक़्त न दिया..
कभी वक़्त ने बेरहमी की.
         (नवम्बर 2009 )

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मिटटी के दीयों से नही जायेगा अँधेरा
दिल का दिया जला सको तो रौशन रात हो.
        (17 अक्टूबर 2009 )

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सारी दुनिया की सुधि पाई, पर मेरे भाई!
क्या सीखा गर प्रेम की पीड़ा समझ न आयी?
         (25 सितम्बर 2009 )

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खुशियाँ लुटाता रहा, खुशियाँ मैं पाता रहा
खुशियाँ बटोरने में लग गया मैं जब से
खुशियाँ मुझसे भागती फिर रही है तब से.
       (05 जुलाई 2009 )

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छलकी हुई आँखों को तेरे होठों ने जब छू लिया
वे आंसू, आंसू न रहे, मोती बने, लुढ़क पड़े.
     (०१ मार्च २००९)

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अपने हाथों से बनाया है मुकद्दर अपना
अपने ही हाथों मिटा डालू तो मलाल नहीं.
       (17 मई  2009 )

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जिन्दगी जब कभी आसान हुई
मैंने कुछ मुश्किलें उधार ली.
      (२२ फरवरी  2009 )

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जिन्दगी इक अंतहीन तलाश है
तृप्ति चुल्लू-भर, समंदर प्यास है.

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गुम गया हूँ आजकल यारों मैं कुछ इस कदर
की दिल से पूछा हूँ कहाँ, उसने कहा-पता नही?
      (15 नवम्बर 2009)