बलात्कार के विरुद्ध
साथियों, इस साल के आखिरी महीनों ने हमारे देश की तथाकथित नैतिकता की पूरी तरह पोल खोल कर रख दी है. आंध्र के राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी हाल में मीडिया में छाया सेक्स स्कैंडल हो या फिर हरयाणा में आज से दो दशकों पहले इक किशोरी का शोषण कर के उसे आत्महत्या पर मजबूर कर देने के आरोप में फंसे हरयाणा के पूर्व पुलिस प्रमुख राठौर का मामला हो,साफ दीखता है कि बाड़ ने ही खेत को खाना शुरू कर दिया है. बच्चियों,किशोरियों और महिलाओं के शोषण का यह जो चक्रव्यूह फैला हुआ है उसके खिलाफ हर एक को उठ खड़े होने कि जरुरत है. देश में जो यह बलात्कारी मानसिकता फैलती जा रही है, उससे हर महिला आज अपने को असुरक्षित महसूस कर रही है. आपके विचारों का इंतजार रहेगा कि इस परिस्थिति में हम लोग क्या बदलाव ला सकते है. मुझे शर्म है की मैं एक ऐसे समाज का हिस्सा हूँ जिसमे कोई भी लड़की खुद को सुरक्षित नही महसूसती घर के बाहर की बेशर्म दुनिया में ही नही नैतिकता के पर्दों से ढके घर में भी. न जाने कैसा कुंठित नैतिक समाज है हमारा जिसमे साठ साला व्य...