रविवार, मई 05, 2013

द्रौपदियों के चीरहरण के देश में

द्रौपदियों के चीरहरण के देश में |

दुर्योधन-दु:शासन है हर वेश में |



एक की रक्षा कर लौटे कि दूजी पुकार |

कृष्ण बेचारे पड़े हुए है क्लेश में |



सत्ता भीष्म पितामह- सी लाचार पड़ी है |

या फिर लुत्फ़ उठाती है, लाचारी के भेष में |



द्रौपदी, कब तक कृष्ण-कृष्ण गुहराओगी |

आ जाओ तुम अब काली  के वेश में |



रक्तबीज की भांति हैं ये कामुक पिशाच |

अट्टहास करो इनके वध के शेष में |

---केश्वेंद्र ---

५-५-२०१३