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ईमान मर नहीं सकता

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे जी के वर्तमान संघर्ष और उसमें लोगों की सहभागिता देख बड़ा ही सुकून भरा अनुभव हुआ. वास्तव में, हमारे देश में बेलगाम होते हुए भ्रष्टाचार को अगर नहीं रोका गया, तो फिर इस महान देश की महानता अतीत की याद भर बन कर रह जायेगी. आज से ७ साल पहले बिहार मे स्वर्णिम चतुर्भुज योजना मे हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार को उजागर करनेवाले ईमानदार इंजिनियर श्री सत्यदेव दुबे को उनकी ईमानदारी की कीमत अपनी जान से चुकानी पड़ी थी. उस प्रसंग मे एक कविता लिखी थी – ‘ईमान मर नहीं सकता’. यह कविता सत्येन्द्र डूबे तथा ईमान की हर उस आवाज को समर्पित है जिसने टूट जाना मंजूर किया पर बेईमानी के आगे झुकना नहीं. उस कविता को एक बार फिर आप लोगों के समक्ष पेश कर रहा हूँ. ईमान मर नहीं सकता आज के इस भयानक दौर में, जहाँ ईमान की हर जुबान पर खामोशी का ताला जडा है और चाभी एक दुनाली में भरी सामने धरी है ; फ़िर भी मैं कायर न बनूँगा, अपनी आत्मा की निगाह में. फ़िर भी मैं, रत्ती भर न हिचकूंगा चलने में ईमान की इस राह पे। मैं अपनी जुबान खोलूँगा मैं भेद सारे खोलूँगा- (बेईमानों- भ्रष्टाचारियों की काली क...

ईमान मर नहीं सकता

 आज के इस भयानक दौर में, जहाँ ईमान की हर जुबान पर खामोशी का ताला जडा है. चाभी एक दुनाली में भरी सामने धरी है , फ़िर भी मैं कायर न बनूँगा अपनी आत्मा की निगाह में फ़िर भी मैं, रत्ती भर न हिचकूंगा चलने में ईमान कि इस राह पे। मैं अपनी जुबान खोलूँगा मैं भेद सारे खोलूँगा- (बेईमानों- भ्रष्टाचारियों की काली करतूतों के ) मैं चीख-चीख कर दुनिया भर में बोलूँगा- ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है। मैं जानता हूँ कि परिणाम क्या होगा- मेरी जुबान पर पड़ा खामोशी का ताला बदल जाएगा फांसी के फंदे में और फंदा कसता जायेगा- भिंच जायेंगे जबड़े और मुट्ठियाँ आँखें निष्फल क्रोध से उबलती बाहर आ जाएँगी प्राण फसेंगे, लोग हसेंगे पर संकल्प और कसेंगे. देह मर जायेगा मगर आत्मा चीखेगी, अनवरत, अविराम- ''ईमान झुक नहीं सकता, ईमान मर नही सकता, चाहे हालत जो भी हो जाये, ईमान मर नही सकता, ईमान मर नही सकता. -2004 - (स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में भष्टाचार को उजागर करने पर जान से हाथ धोने वाले 'यथा नाम तथा गुण' सत्येन्द्र डूबे तथा ईमान की हर उस आवाज को समर्पित जिसने झुकना गवारा ना किया बेईमानी...