कटुक वचन मत बोल
कड़वाहट का बीज जो बोते चलते हैं । जब पौधे में फल आता है , फल को खाकर, मुंह बिचकाकर; थू थू करते फिरते हैं। कड़वाहट का बीज जो बोते चलते हैं ।
प्रेम अकेला कर देता है/ मन में पीड़ा भर देता है/ कुछ खोने का डर देता है/ ख़ामोशी को स्वर देता है/ नयनों में जल भर देता है/ दुनिया बदल कर धर देता है/ प्रेम अकेला कर देता है//