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Poem by Keshvendra लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कटुक वचन मत बोल

  कड़वाहट का बीज जो बोते चलते हैं । जब पौधे में फल आता है , फल को खाकर, मुंह बिचकाकर; थू थू करते फिरते हैं। कड़वाहट का बीज जो बोते चलते हैं ।