एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना
एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना | एक चिड़िया जो टूट कर भी टूटी न थी चिड़ा छोड़ चला उसे, फिर भी आस टूटी ना थी जग से रूठ कर भी खुद से वो अभी रूठी ना थी उसके सपनों ने फिर से सीखा चहचहाना | एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना | नन्ही चिड़िया ने सहे कितने जुल्मो-सितम जीती रही खूंखार दुनिया में वो सहम-सहम और उसपे, कि दुनिया ने नहीं किया कोई रहम चिडियाँ जीती रही भूल कर के पंख फैलाना | एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना चिडियाँ जीती रही बरगद की कोटर तले साँझ ढलती रही, आस का दीपक नही ढले उसे अब भी था यकीं चिड़ा आएगा मगर दुनिया ने छीना उससे उम्मीदों का ताना-बाना | एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना | कितना रोई चिड़ी जब हुआ, उसका चिड़ा पराया रोती रही वो पर, आँखों से आंसू तक ना आया चिड़िया बुत बनी, वो बन गयी अपनी ही छाया दुनिया के कायदों ने छीना उसका मुस्कुराना | एक चिड़िया को फिर से मिला आशियाना चिड़िया घुटती रही, खुद में सिमटती रही अपने पंखों को फ़ैलाने से बचती रही थोड़ी-थोड़ी जिंदादिली उसकी रोज मरती रही बरगद रो देता था सुन के उसका दर्द भरा गाना | एक चिड़िया को फिर से मिल...