शुक्रवार, जुलाई 28, 2017

मन का टुकड़ा मनका बनाकर

मन का टुकड़ा
मनका बनाकर
मनबसिया का ध्यान करूं |

प्रेम की राह बहुत ही जटिल है ;
चल- चल कर आसान करूं |

(१५ जुलाई २०१७, रात्रि  )

4 टिप्‍पणियां:

MAHESH DWIVEDI ने कहा…

NICE LINES SIR...

Pritima Vats ने कहा…

bahut achchi kavita.hamare blog par aapka swagat hai.

https://lokrang-india.blogspot.in/

Taru ने कहा…

वाह केशव जी !
उम्दा एवं गेय पंक्तियाँ !!!
:)

Pushpendra Dwivedi ने कहा…

खूबसूरत भावनात्मल रचनात्मक अभिव्यक्ति