शनिवार, जून 20, 2009

केरल- चंद क्षणिकाएँ

*घर से इतनी दूर आया, मन था दुखी- दुखी
केरल की पहली बारिश में भीगा, हुआ सुखी

*भाषा नई -नई है, है परिवेश नया-नया
लोग मुखर हैं बहुत और मेरा मौन नया-नया
एक पुरानी चीज साथ जिसने ना छोड़ा है
बस एक तन्हाई है जिसने मुख ना मोड़ा है.

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