गुरुवार, अक्तूबर 13, 2011

जाना जगजीत का

जगजीत के जाने से गज़लों की दुनिया में जो सूनापन छाया है, उसके लिए यही कह सकते हैं कि जिंदगी की धूप से राहत देनेवाला गज़लों का सबसे घना सायादार वृक्ष आज नही रहा. जगजीत आज जहां चले गए हैं, वहां से चिट्ठी या सन्देश तो नही आने वाला पर उनकी गज़लों के सुर अब भी हम तक पहुचते रहेंगे. जगजीत के होठों ने जिन गज़लों को छुआ, उन्हें अमर कर डाला. उनकी गज़लों ने ना जाने कितने लोगों को प्यार का पहला खत लिखना सिखाया तो कितने लोगों को उनके बचपन की कागज की कश्ती और बारिश के पानी की याद दिला दी. उनकी गज़लों ने लोगों को हंसाते-रुलाते जिंदगी के हर रंग से रूबरू करवाया. उनके जाने पर तो बस इतना ही कह सकते हैं-

"तुम ये कैसे जुदा हो गए
हर तरफ हर जगह हो गए."

4 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

vinamra shraddhanjli

सदा ने कहा…

विनम्र श्रद्धांजली के साथ नमन ..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

भावभीनी श्रद्धांजलि ..नमन

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें .


कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.