मंगलवार, अगस्त 30, 2011

समंदर का गीत

समंदर आज भी वही गीत गाता है
जो उसने पहली बार गाया था
जब वो अस्तित्व में बस आया था |

समंदर की रेत के हर कण
और समंदर का हर जड़ -चेतन
मिलेंगे तुम्हें उसी आदिम गीत में मगन |

फिर इसमें अचरज क्यूँ हो कि
समंदर जब भी लहरों के सुर में गाता है
हर सुनने वाला गीतमुग्ध रह जाता है |

२१-७-२०११

4 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Bahut Sunder.....

smita ने कहा…

beautifull. <3

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति बधाई और शुभकामनाएं

Rajey Sha राजे_शा ने कहा…

बस आदमी ही अपनी असलियत भूल जाता है
इसे चिराग क्यों कहते हो?