बुधवार, दिसंबर 25, 2013

त्रिवेणी - जख्म और पेड़


जख्म और पेड़ हरे ही अच्छे |

सूख जाने पे मर जाते हैं दोनों ||


सींचते रहिये इन्हें आंसू और पानी से |

--केशव--

4 टिप्‍पणियां:

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-12-2013 को चर्चा मंच की चर्चा - 1473 ( वाह रे हिन्दुस्तानियों ) पर दिया गया है
कृपया पधारें
आभार

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रंग और हमारी मानसिकता

मनोज कुमार ने कहा…

यें चींचन बहुत ज़रूरी है।

abhishek shukla ने कहा…

bahut khoob..