उसने देखा इस नज़र से

उसने देखा इस नज़र से |
मैं गिरा अपनी नज़र से ||

अधर में बड़ी देर डोला |
टूटा पत्ता जब शज़र से ||

रात कितनी बाकी है अभी |
पूछे सन्नाटा गज़र से ||

साथ रखना दुआएँ माँ की |
बचाएंगी बुरी नज़र से ||

नज़र में ना चुभो किसीकी |
सबको बरतो इस नज़र से ||


नज़र न आए यार मेरा |
मगर नहीं है दूर नज़र से ||

आईना मैं हूँ तुम्हारा |
मुझको देखो इस नज़र से ||

दिल में अंक गई नजरे उसकी |
उसने देखा इस नज़र से ||

टिप्पणियाँ

Umesh ने कहा…
बहुत बढ़िया है केशवेन्द्र!
"उसने देखा इस नज़र से |
मैं गिरा अपनी नज़र से ||"
एक लम्बे समय बाद तुम्हारे ब्लॉग पर आया तो मजा आ गया।
virendra sharma ने कहा…
साथ रखना दुआएँ माँ की |
बचाएंगी बुरी नज़र से ||
उम्दा ग़ज़ल हर अशआर काबिले दाद .
S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…
साथ रखना दुआएँ माँ की |
बचाएंगी बुरी नज़र से ||

बहुत बढ़िया रचना...
हार्दिक बधाई..
virendra sharma ने कहा…
रात कितनी बाकी है अभी |
पूछे सन्नाटा गज़र से ||
बेहतरीन .
vidya ने कहा…
वाह!!!
खूबसूरत रचना...

बहुत खूब..
वृजेश सिंह ने कहा…
होली की हार्दिक शुभकामना।