मंगलवार, फ़रवरी 14, 2017

प्रेम पंखुरियां

प्रेम नही होता जग में तो कितना अच्छा होता |
ऐसे ही बिन बात के ना कोई  हँसता, ना कोई  रोता ||

प्रेम किये दुःख होत है, यह जानत हर कोय |
फिर भी प्रेम के चंगुल से बांच सका ना कोय ||

प्रेम घृणा में, घृणा प्रेम में ऐसे आवृत्त है |
प्रेम से घृणा,घृणा से प्रेम- एक ही वृत्त है ||

प्यार करना है सरल, मुश्किल निभाना है |
प्रेम पथ में ना है मंजिल, ना ठिकाना है ||

प्रेम को जो ना जाने,वो हैं पीटे ढिंढोरा |
प्रेम के पंडित अक्सर ही खामोश देखे हैं  ||

प्रेम पंथ है अति कठिन, नट की रस्सी जान  |
एक चूक भी गर हुई, ना बच पाए प्राण ||

आभासी दुनिया के बाशिंदे क्या बूझेंगे प्यार |
लाभ-हानि के गणित से परे, है प्रेम व्यवहार ||

प्रेम  भुला देता है सारी दुनियादारी |
दुनियादारी को अक्सर प्रेम याद आता है ||


2 टिप्‍पणियां:

Maurya Singh ने कहा…

Very Nice sir ji

Maurya Singh ने कहा…

Very Nice sir ji