गुरुवार, अप्रैल 22, 2010

दिल फिर से उम्मीदों की फसल बो गया है

साथियों, आपकी खिदमत में पेश है मेरी शुरुआती गजलों में एक ग़ज़ल. वर्ष 2004  में जब मैंने ग़ज़ल विधा पार हाथ आजमाने की शुरुआत की थी, तो उस समय की लिखी हुई ये छठे नंबर की ग़ज़ल है. ग़ज़ल में मामूली सा संसोधन किया है और कुछ नए शेर आज की रात में जोड़े हैं. शेर संख्या 3-8  नए हैं, आज के लिखे हुए हैं. बाकी शेर पुराने हैं और मार्च 2004 के लिखे हुए हैं.


आपसे मिला हूँ कुछ इस कदर , जिन्दगी का चैन खो गया है
सब कुछ तो है चैन से, बस दिल जरा बैचैन हो गया है. (१)

वो जो फूल है गुलाब का, काँटों के संग खुश था
और झरते-झरते विरह में दो बूँद आंसू रो गया है. (२)

माँ के हाथ नींद में भी झूले को हैं झुला रहे 
 लोरी सुनते-सुनते बच्चा सो गया है . (3)

अब गिले-शिकवा मिटा के, उसको लगा लो गले
जो आंसुओं  से दिल के दाग-धब्बे  धो गया है. (4)

कचरे से कुछ बीन कर खाते हुए भिखारी ने कहा
भला  हो ऊपरवाले  का कि पेट में कुछ तो गया है. (5)

लौट कर वो आ ना सका, राहे सारी बंद थी
लक्ष्मण रेखा पार कर के जो गया है.   (6)

जाने वालों को यूँ तड़प कर पुकारा नही करते
जाने दो उसे, जो गया है वो गया है.   (7)


दुनियावालों और कितने पाप करोगे, व्यर्थ में
पुराने पापों की गठरी मसीहा  ढ़ो गया है.   (8)

वो आया था यहाँ तब , रो रहा पुरजोर था
पर मिला है मुझसे जो, हँसते हुए वो गया है. (9)

दर्द जब इतना मिला है कि खुद पे बस न रहा है
न जाने किस ने थपकी दी है , हर ग़म खो गया है. (10)

मेरी आँखों में सपना था, मेरी यादों में अपना था
न जाने किसने झकझोड़ा  है , सब कुछ खो गया है. (11)

जिन्दों कि भीड़ में जिन्दगी है गुम गयी कुछ इस कदर
गोया कौमों कि भीड़ में फुलस्टॉप खो गया है. (12)

फसल उम्मीदों कि भले ही इस बार जल गई हो
मगर दिल फिर से उम्मीदों  की फसल बो गया है. (13)

7 टिप्‍पणियां:

rajeevspoetry ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति.

KESHVENDRA ने कहा…

राजीव जी, आपका ढेर सारा शुक्रिया.

संजय भास्कर ने कहा…

blog shirshak par likhne ke liye dhanyawaad

संजय भास्कर ने कहा…

सब कुछ तो है चैन से, बस दिल जरा बैचैन हो गया है.

........लाजवाब पंक्तियाँ

KESHVENDRA ने कहा…

Shukriya Sanjay ji.

Umesh ने कहा…

'pet mein kuchh to gaya hai' kahkar desh ke karodon khali peton ka haal tumne bakhoobi bayaan kar diya hai. Is soorat-e-haal ko badla kaise jaa sakta hai, yeh mutmayeeni abhi tak nahi ho pa rahi. Amartya Sen kee baatein bhi laffaji lagti hain. Umesh KS Chauhan

KESHVENDRA ने कहा…

Sir, aapka dher sara shukriya. Wakai, bhookh ka mudda hal kiye bina ham Mahan Bharat ki bat nhi kar sakte. Blog ki duniya me aapka hardik swagat hai. Aapki rachnaon ka intjar rahega.