सोमवार, मई 03, 2010

ऐसी भी क्या कमी दिखी, मौला इस दीवाने में

एक ही चर्चा छेड़ा करते हैं अपने हर गाने में !


दर्द मिला मुझे ज्यादा तेरे आने में या जाने में !!



एक ही तेरा ग़म था जिसको कहते रहे अफ़सानों में!

इक अपना जो बिछड़ा उसको ढूंढा हर बेगाने में !!



ग़म-ही-ग़म पाकर अब रब से पूछा करते हरदम हम!

ऐसी भी क्या कमी दिखी, मौला इस दीवाने में !!



चैन से हम मर भी ना पाए, ओ संगदिल, तू ये तो बता!

काहे इतनी देर लगा दी, जालिम तूने आने में!!



खुद को पाना हो या खुदा को, इश्क की आग में जलके देख!

शमा के इश्क़ में जलते-जलते यही कहा परवाने ने!!



दिल की रस्साकस्सी में ना मालूम था ऐसा होगा!

दिल की रस्सी ही टूट गयी इक-दूजे को आजमाने में!!



तुमको खोने की चिंता में जीते जी कई बार मरा!

पर खो डाला तुझको मैंने शायद तुझको पाने में!!

6 टिप्‍पणियां:

राजेन्द्र मीणा 'नटखट' ने कहा…

पहली बार यात्रा की आपके चिट्ठे की ,,,,,अच्छा लिखते हो .....एक शानदार प्रस्तुति के लिए ..बधाई स्वीकारे ,,,बस सफ़र जारी रखे ..रुके नहीं ..हामारी शुभ कामनाये आपके साथ है....

http://athaah.blogspot.com/

KESHVENDRA ने कहा…

शुक्रिया राजेंद्र भाई.

singhsdm ने कहा…

केशव भाई
अब तो मसूरी के दिन गिन रहा हूँ.......वहीँ लम्बी परिचर्चाएं होंगी......
फिलहाल तो आपकी ग़ज़ल पढ़ रहा हूँ.....

एक ही चर्चा छेड़ा करते हैं अपने हर गाने में !
दर्द मिला मुझे ज्यादा तेरे आने में या जाने में !!
और
खुद को पाना हो या खुदा को, इश्क की आग में जलके देख!
शमा के इश्क़ में जलते-जलते यही कहा परवाने ने!!
आहा रवायती ग़ज़ल की तर्ज़ के शेर.......बहुत अच्छे !

ग़म-ही-ग़म पाकर अब रब से पूछा करते हरदम हम!
ऐसी भी क्या कमी दिखी, मौला इस दीवाने में !!
बहुत सही .........!

दिल की रस्साकस्सी में ना मालूम था ऐसा होगा!
दिल की रस्सी ही टूट गयी इक-दूजे को आजमाने में!!
वाह ......!

KESHVENDRA ने कहा…

Pawan bhai, Mussoorie ke dino ka intjar to idhar bhi ho rha hai. Is bar academy me hansi-khushi-anand me 2 mahine bitane hain. Gazal ko pasand karne ka shukriya.

संजय भास्कर ने कहा…

सुंदर, सटीक और सधी हुई।

KESHVENDRA ने कहा…

Shukriya Sanjay Bhai.