बुधवार, फ़रवरी 23, 2011

अब तलक इश्क पे उम्मीद मेरी कायम है

हुस्न हरदम मिला पराया है मगर !
इश्क का अपने सर पे साया है मगर !!

तुम नही आते हो ख्वाबों तक में !
आंसू तेरी याद में आया है मगर !!

अब तलक इश्क पे उम्मीद मेरी कायम है !
इश्क की राह में धोखा बहुत खाया है मगर !!

इश्क की खातिर उठाया दुनिया का हर सलीब !
इश्क में खुद टूटे, इश्क को टूटने से बचाया है मगर !!

लो, आखिर इश्क की मंजिल पे आ ही पहुंचे हम !
इश्क की राहों में कदम कई बार लडखडाया है मगर !!

यार को देख कर चेहरे पे खिल उठी मुस्कान !
इस ख़ुशी की खातिर दिल दर्द से नहाया है मगर !!

1 टिप्पणी:

smita ने कहा…

इश्क में खुद टूटे, इश्क को टूटने से बचाया है मगर !! this is just heart touching line....
keep it up...