रविवार, दिसंबर 27, 2009

नए साल के भारत से

नए साल के भारत से है  उम्मीदे नयी-नयी
झारखण्ड का भ्रष्ट नाच ना हो फिर से कभी
फिर से किसी रुचिका को ना जान गवानी पड़े
और ना कोई अपराधी पा जाये सत्ता की कुर्सी

रीढविहीन प्रजातंत्र को उसकी बैकबोन मिल जाये
नेताओं-अफसरों में थोड़ी नैतिकता आ जाये
बेचारी निरीह जनता की निरीहता गुम जाये
देश को प्रेरित कर सकने वाले कुछ नेता सामने आये

आतंकवाद और नक्सलवाद का तांडव नृत्य थमे
भाषा और क्षेत्रीयता के झगडे अब तो जरा कमे
कूटनीति में भारत फिर से चाले अच्छी चले
दुनिया के मसलो में भारत की तूती बोले   

ग्राफ गरीबी का तेजी से नीचे आता जाये
हर हाथ को काम और हर मुंह दाना पाए
शिक्षा का स्तर तेजी से ऊपर चढ़ता जाये
भारत और इंडिया की खाई पाटी जाये .

दुआ यही है की भारत का ना आशावाद मरे
इतने सालों से आशा पर जिन्दा हैं कितने मुर्दे.

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