मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

गुनगुनाते हुए तुमको इक ग़ज़ल की तरह

गुनगुनाते हुए तुमको इक ग़ज़ल की तरह
मैंने पाया है तुम्हे ख्वाबों की खुशबू की तरह

जब भी मैं घिरा हूँ तन्हाई के अंधेरों में
तेरी यादों को मैंने पाया है जुगनू की तरह

डूबते-उतराते तेरी आँखों में
तेरी आँखें दिखी है मुझको सागर की तरह

तुम जो हंसती हो तो मेरा दिल भी झूम उठता है
मैंने पाया है तेरी हंसी को फूलों की तरह

तेरे चेहरे को देखते नही भरता मन है
तेरा चेहरा है अँधेरे में रौशनी की तरह

तू-ही-तू है हर तरफ मेरी जिन्दगी में
अब तो तेरा होना है मेरे होने की तरह.

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