शुक्रवार, मार्च 05, 2010

छाई इक धुंध- सी उदासी है

सब तो है पर कमी जरा-सी है!

जिन्दगी लगता है कि बासी है!!





तेरी यादों के सर्द मौसम पर!

छाई इक धुंध- सी उदासी है!!



जिस्म की बात छोडो जाने दो!

रूह तक मेरी कब से प्यासी है!!



कान कब से मेरे तरस से गए!

तुम से मिलती नही शाबासी है!!



साथ तुम थी तो लगता था,ये दुनिया!

जन्नत तो नहीं है पर वहां-सी है!!



तू खफा मुझसे, कोई बात नही!

शुक्र है, यादें तेरी, मेहरबां-सी है!!



हाल अब तो है ये अपना कि!

जुबां होते हुए हालत बेजुबां-सी है!!

2 टिप्‍पणियां:

singhsdm ने कहा…

keshav bhai....
kya kahar dha rahe ho......
Ek sher apna-ek paraya to andar tak choo gaya....!
ek shandar koshish thi jo had tak kamyab hai.....
subhan allah...

KESHVENDRA ने कहा…

Dher sara shukriya Pawan Bhai...Ek sher apna-ek paraya ki dusri kadi ke sath jald hi hajir hounga..Or jaldi hi Mussoorie me aapse mulakat ka intjar rahega.