ऐसी ही कोई आस हूँ. लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जनवरी 27, 2010 ना खुश हूँ, ना उदास हूँ! ना दूर हूँ, ना पास हूँ!! मिट पाए ना मिटाने से! ऐसी अबूझ प्यास हूँ!! हर पाँव जिसको रौंदता! बेबस-सी मैं वो घास हूँ!! सारी उदासी धुल उठे! ऐसा मुकम्मल हास हूँ!! बुझ-बुझ के भभक जो उठे! ऐसी ही कोई आस हूँ!! लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा… बेहतर...यहां यही महसूस हुआ...अच्छा लगा... KESHVENDRA IAS ने कहा… रवि भाई, ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.
टिप्पणियाँ
यहां यही महसूस हुआ...अच्छा लगा...